Skip to main content

इंदौर में हेल्थवर्कर्स को एचसीक्यूएस का डोज दिया गया, फिर भी डॉक्टर-नर्सों समेत 14 संक्रमित हुए

(नीता सिसौदिया)दुनियाभर में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन (एचसीक्यूएस) दवा को कोरोना के बचाव में कारगर माना जा रहा है। सवाल यह है कि क्या इंदौर में संक्रमित हुए कोरोना का इलाज कर रहे 3 डॉक्टर, 9 नर्स और 2 टेक्नीशियन ने यह दवा नहीं ली थी? दरअसल, स्वास्थ्यकर्मियों को देने के लिए स्वास्थ्य विभाग को दो लाख गोलियां दी गई थीं। मेडिकल कॉलेज ने भी लाखों की संख्या में दवा खरीदी। डॉक्टर्स और नर्सिंग स्टॉफ ने दवा का डोज़ लिया भी। इसके बावजूद डॉक्टर-नर्सों समेत 14 हेल्थवर्कर्स संक्रमित हो गए। इनका एमआर टीबी अस्पताल में इलाज चल रहा है।

एचसीक्यूएस लेने के बाद भी संक्रमण, ऐसा क्यों?

  • पॉजिटिव आईं एक गर्भवती नर्स के अलावा सभी ने दवा ली थी, लेकिन कोई भी दवा का पूरा कोर्स नहीं ले पाया।
  • पहले दिन दो गोलियां लेने के बाद साप्ताहिक रूप से इसका सेवन किया जाता है। इनमें से किसी ने एक हफ्ता, किसी ने दो हफ्ते तो किसी ने तीन हफ्ते तक यह दवा खाई।
  • दवा लेने वालों में से कोई भी क्रिटिकल स्थिति में नहीं पहुंचा।
  • एमवायएच में कार्यरत मेल नर्स की कोरोना वार्ड में ड्यूटी लगी। उसी दिन उन्होंने एचसीक्यूएस लेना शुरू कर दिया था। पहले दिन सुबह-शाम डबल डोज और एक हफ्ते बाद सिंगल डोज लिया। तीसरे हफ्ताडोज लेते, उससे पहले ही लक्षण दिखाई देने लगे और उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई।
  • स्त्री रोग विभाग की नर्सरी में पदस्थ एक नर्स संक्रमित हो गईं। नर्स ने कोरोना संक्रमित संदिग्ध महिला के नवजात का टीकाकरण किया था। उसके चार दिन पहले ही एचसीक्यूएस ली थी।

डॉक्टर बोले- दवा लेने परकोरोना का असर कम हुआ

एनेस्थीसिया विभाग में पदस्थ एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कबीर कौशल की ड्यूटी एमआर टीबी हॉस्पिटल में लगी थी। ये चौथे हफ्ते की दवा लेते उससे पहले कोरोना की चपेट में आ गए। अब वे डिस्चार्ज हो गए हैं। वे कहते हैं कि एचसीक्यूएस संक्रमण से बचाती नहीं है, तीव्रता कम कर देती है। संभवत: दवा के कारण ही बीमारी का प्रभाव मुझ पर नाम मात्र का रहा।

स्टडीक्या कहती है

आईएमए के सचिव और गठिया रोग विशेषज्ञ डॉ. सौरभ मालवीय बताते हैं कि शरीर के सेल एसिटिक होते हैं, यह दवा उनका पीएच लेवल बढ़ाती है, जिससे वायरस सीधे अटैक नहीं कर पाता। हालांकि दवा के कोरोना संक्रमण पर असर को लेकर बहस चल रही है।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
इंदौर के एक अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज करते हुए डॉक्टर। (फाइल फोटो)


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2KGuqVI
via IFTTT

Comments

Popular posts from this blog

किसान दादा का दर्द देख 9 साल के बच्चे ने बनाया टिकटॉक वीडियो, मासूमियत भरी आवाज में वह बोला- देखो, गेंदा कैसे फेंकना पड़ रहा है

कुणाल की उम्र नौ साल है और वो मेरठ जिले के लावड कस्बे में रहते हैं। उनके दादा छेद्दा सिंह एक किसान हैं और बीते कई साल से गेंदे के फूल की खेती कर रहे हैं। इस साल जब लॉकडाउन के चलते छेद्दा सिंह की फूलों की सारी फसल बर्बाद होने लगी तो कुणाल ने अपने दादा की मदद के लिए एक बेहद मासूम प्रयास किया। कुणाल ने एक बर्बाद होते फूलों का एक वीडियो बनाया और टिकटॉक पर इसे साझा करते हुए कहा, ‘देखिए भाइयों देखिए। किसानों को खेत से बाहर कैसे फेंकना पड़ रहा है गेंदा। किसानों का कोरोना वायरस की वजह से बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है। इसीलिए इस वीडियो को लाइक और शेयर करके आगे बढ़ाएं।’ भरपूर मासूमियत और बेहद उत्साह के साथ कुणाल बताते हैं कि उनका ये वीडियो अब तक 125 लोगों ने देख लिया है। यह पूछने पर कि उन्होंने यह वीडियो क्यों बनाया, वे पूरे आत्मविश्वास के साथ कहते हैं, ‘ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग जान सकें कि कोरोनावायरस के कारण किसानों को कितना नुकसान हो रहा है।’ जिस नुकसान का जिक्र कुणाल कर रहे हैं उसकी मार इन दिनों मेरठ की सरधना तहसील के सैकड़ों किसान झेल रहे हैं। यहां लावड कस्बे में सब्जियों और फूलों की अच्छी...

The mystery of the 'blue monkeys' in ancient Grecian frescoes, solved

via World news – breaking news, videos and headlines - CNN https://ift.tt/3ejZ05j

पहली बार ऐसा होगा जब घर पर ही पढ़ी जाएंगी नमाज, चांद दिखने पर 24 या 25 मई को मनेगी ईद

कल यानी शुक्रवार, 24 अप्रैल को चांद दिखने के बाद आज से रमजान महीने की शुरुआत हो गई है। 23 अप्रैल को साउदी अरब में चांद दिखने पर वहां रमजान महीना शुरू हो गया है। कोरोना संक्रमण के कारण जारी लॉकडाउन में मुस्लिमपहली बार तरावीह की नमाज घरमें ही अदा करेंगे। तरावीह रमजान में पढ़ी जाने वाली खास नमाज को कहते हैं।सऊदी अरब सरकार ने मक्का-मदीना बंद कर रखा है। इस कारण वहांउमराह के लिए भी लोग नहीं जा सकेंगे। जून-जुलाई में हज के निरस्त होने की भीआशंका है। 25 अप्रैल यानी आज से एक महीने तक रोजे रखकरपांचवक्त की नमाज व तरावीह घर पर ही पढ़ी जाएंगी। लॉकडाउन व सोशल डिस्टेंसिंग के कारण मसजिदों में नमाज पढ़ने पर रोक लगी है। इस महीने रोजेदार करीब 15 घंटे भूखे-प्यासे रहकर इबादत करेंगे। रमजान के खास दिनशब-ए-कद्र 20 मई को औररमजान का अलविदा जुमा 22 मई को रहेगा। चांद दिखने पर ईद-उल-फितर 24 या 25 मई को मनाया जाएगा। तीस दिन तक अदा की जाएगी तरावीह की नमाज हर मुसलमान को दिन में 5 बार नमाज पढ़ने का नियम है, लेकिन रमजान में 6 बार नमाज पढ़ी जाती है। छठी नमाज रात में होती है, इसे ही तरावीह कहा जाता है। इस नमाज में हर ...

कोरोना के इलाज के लिए मलेरिया की दवा की मांग बढ़ी, भारत इसका सबसे बड़ा सप्लायर, हर महीने बना सकता है 30 करोड़ टैबलेट्स

दुनिया कोरोनावायरस संकट से जूझ रही है। कोराेना के खिलाफ कोई कारगर दवा अभी तक नहीं है।ऐसे में सिर्फ एक दवा हाइड्रोक्सी-क्लोरो-क्विन (एचसीक्यू) की सबसे ज्यादा चर्चा है। केंद्र सरकार ने 25 मार्च को इसके निर्यात पर बैन लगा दिया था। बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति की मांग पर बैन हटाया गया। सिर्फ अमेरिका ही नहीं, दुनिया के कई देश भारत से इस दवा की मांग कर रहे हैं। यह दवा कोरोना की नहीं, बल्कि मलेरिया की है। शुरुआती स्तर पर अभी तक कोरोना के संक्रमण और लक्षणों को कम करने में इसे सबसे ज्यादा प्रभावी माना जा रहा है। हालांकि,शनिवार को देश के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि यह दवा किसको और कितनी देनी है, इस बारे में वह कोई अनुशंसा नहीं करता है। साथ ही यह भी कहा कि बिना डॉक्टर की सलाह के यह दवाई न ली जाए। पिछले 76 साल से भारत में एंटी मलेरिया और रूमेटाइड अर्थराइटिस के उपचार में उपयोग की जा रही इस दवाई की अचानक से बाजार में किल्लत हो गई है। सबसे पहले बड़े पैमाने पर दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान इस दवा का उपयोग हुआ था। यह टैबलेट मूल रूप से इम्यून पॉवर को बढ़ाती है। भारत ने 13 देशों के लिए अपना...

लॉकडाउन से गंगा में मानव मल की मात्रा लक्ष्मण झूले के पास 47 और हरिद्वार में 25 प्रतिशत कम हुई

इन दिनों गंगा-यमुना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तैर रहे हैं। सुखद आश्चर्य के साथ लोग इन वीडियो में बता रहे हैं कि कैसे देश भर में हुए लॉकडाउन के बाद इन नदियों का पानी स्वतः ही बेहद साफ नजर आने लगा है। दिल्ली तक आते-आते जो यमुना पूरी तरह से गंदा नाला दिखने लगती है, इन दिनों फिर से नदी लगने लगी है। ऐसे ही गंगा भी इन दिनों इतनी साफ लगने लगी है कि ऋषिकेश-हरिद्वार तक तो उसके पानी को पीने योग्य बताया जाने लगा है। उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की हालिया रिपोर्ट बताती है कि ऋषिकेश के लक्ष्मण झूला क्षेत्र में इन दिनों गंगा के पानी में फ़ीकल कॉलिफोर्म (मानव मल) की मात्रा में 47 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं ऋषिकेश में बैराज से आगे यह कमी 46 प्रतिशत, हरिद्वार में बिंदुघाट के पास 25 प्रतिशत और हर की पौड़ी पर 34 प्रतिशत दर्ज की गई है। इस रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है लॉकडाउन के दौरान हर की पौड़ी पा गंगा का पानी ‘क्लास-ए’ स्तर का हो चुका है। यानी इसे ट्रीट किए बिना ही सिर्फ़ क्लॉरिनेशन करके भी पिया जा सकता है। ऐसे में यह सवाल बेहद प्रासंगिक लगता है कि गंगा-यमुना सफ़ाई के नाम पर खर्च हो चुक...

Companies badly hit by coronavirus COVID-19 pandemic targets of foreign takeovers, says Rahul Gandhi

via Google News https://ift.tt/3eiFzd9