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मुश्किल वक्त में मां ही सबसे मजबूत साबित होती है, कोरोना फैला और हिम्मत की सबसे ज्यादा जरूरत पड़ी तो बच्चों की ताकत बनकर लड़ीं दुनियाभर की माएं
सबसे पहले बात चीन के वुहान में हुई एक स्टडी की। जामा पीडिएट्रिक्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वुहान में 33 बच्चे संक्रमित मां से पैदा हुए थे। जिनमें से तीन को छोड़कर सभी स्वस्थ्य थे। जो तीन संक्रमित थे उनमें से 2 बच्चे 6 दिन के होने से पहले ही ठीक भी हो गए थे।
इस रिपोर्ट का जिक्र इसलिए क्योंकि वुहान वह जगह है जहां से कोरोना संक्रमण की शुरुआत हुई। और वहां की ये रिसर्च बताती है कि मां मुश्किल वक्त में मजबूत साबित होती है। और अपनी हिम्मत से बच्चों की सुरक्षा करती है। मेडिकल साइंस ये बात माने या न माने ये तस्वीरें यही कहानी कह रही हैं...
तस्वीर वियतनाम के हनोई शहर की है। यहां एक मां ने अपने छोटे बच्चे को कोरोना से बचाने के लिए शील्ड पैक कर दिया है। यहां अब तक कोरोना के सिर्फ 288 मरीज मिले हैं। अच्छी बात ये है कि यहां कोरोना ने अब तक किसी की जान नहीं ली।
तस्वीर इंडोनेशिया के जावा शहर की है, जिसे 1 अप्रैल को खींचा गया था। इस तस्वीर में जो दिख रही हैं, वो हैं 35 साल की युका, जो अपने 12 दिन के बेटे को गोद में खिला रही हैं। कोरोना की वजह से इंडोनेशिया के अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं के साथ सिर्फ एक व्यक्ति को ही जाने की इजाजत है। यहां अब तक करीब 13 हजरा 700 केस और 950 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। अब जाते-जाते इस बच्चे का नाम भी जान लीजिए। युका ने इसका नामएलजुना सतरिया नुगरोहो रखा है।मां पहले बच्चों को खिलाती है, फिर खुद खाती है। ये तस्वीर इसका सटीक उदाहरण है। कोलकाता की ये तस्वीर 5 अप्रैल को ली गई थी। लॉकडाउन की वजह से मजदूरों और छोटे कामगारों का काम ठप हो गया। लेकिन, उसके बाद भी मां कहीं से खाना लेकर आई और अपनी दोनों बेटियों को दे दिया। बड़ी बेटी भी इतनी समझदार कि पहले अपनी छोटी बहन को खिला रही है।तस्वीर श्रीनगर की है। यहां एक मां 14 दिन का क्वारैंटाइन पीरियड पूरा करने के बाद जब 6 अप्रैल को बाहर आई, तो अपने बच्चे को गोद लेने से पहले मास्क और ग्लव्स पहनना नहीं भूली। जम्मू-कश्मीर में 9 मई तक 823 केस आ चुके हैं। जबकि, 9 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।तस्वीर ब्राजील की है। कोरोना को फैलने से रोकने के लिए यहां की सरकार ने गरीब बेघरों को शेल्टर होम में रखा है। शेल्टर होम के गेट से झांकता ये बच्चा शायद यही सोच रहा होगा कि कब यहां से बाहर निकलूंगा। ब्राजील में अब तक 1.5 लाख कोरोना मरीज आ चुके हैं। संक्रमण से अब तक 10 हजार से ज्यादा की मौत भी हो चुकी है।कोरोना से बचने का तरीका है- मास्क पहनना। लेकिन, जब मास्क नहीं मिला तो फिलीस्तीनी मां ने अपने बच्चों को सब्जी के पत्तों से बना मास्क ही पहना दिया। फिलीस्तीन में अब तक 400 से भी कम मामले आए हैं। जबकि, सिर्फ 4 मौतें ही यहां कोरोना से हुई है।कोरोना की वजह से लॉकडाउन है और सैलून बंद पड़े हैं। ऐसे में ब्रिटेन के कील शहर में रहने वाली मां ने खुद ही कंघा-ट्रिमर लिया और बच्चे के बाल कटने शुरू कर दिए। यूरोपीय देशों में ब्रिटेन सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। यहां अब तक 2.10 लाख से ज्यादा मामले आ चुके हैं। जबकि, 31 हजार मरीज दम तोड़ चुके हैं।तस्वीर थाईलैंड के बैंकॉक शहर की है। चीन के जिस वुहान शहर से कोरोना निकला, वहां से बैंकॉक की दूरी 2.5 हजार किमी से भी कम है। फिर भी यहां अब तक 3 हजार के आसपास ही मरीज मिले हैं और 56 मौतें हुई हैं। अब यहां धीरे-धीरे सब नॉर्मल भी हो रहा है। इस तस्वीर को देखकर तो यही लग रहा है कि मानो अपनी मां का हाथ थामे बच्ची कोरोना को बोल रही हो कि जब तक मां है, तब तक तू मुझे छू भी नहीं सकता।तस्वीर लेबनान के सिडोन शहर की है। कोरोना उसकी मां को छू भी न सके, इसके लिए बच्चा खुद अपनी मां को मास्क पहना रहा है। यहां अब तक करीब 800 केस मिल चुके हैं। 26 लोगों ने कोरोना की वजह से दम भी तोड़ दिया है।तस्वीर फिलीपींस के मनीला शहर की है। गरीब बेघरों को कोरोनावायरस से बचाने के लिए सरकार ने यहां के एक स्कूल को शेल्टर होम में तब्दील कर दिया है, जहां इन लोगों को ठहराया गया है। ऐसे ही एक शेल्टर होम में ठहरी एक मां मास्क पहनकर अपने बच्चे को दूध पिला रही है। फिलीपींस में अब तक 10 हजार से ज्यादा कोरोना के मामले आ चुके हैं। इससे अब तक यहां 700 से ज्यादा मौतें भी हुई हैं।
कुणाल की उम्र नौ साल है और वो मेरठ जिले के लावड कस्बे में रहते हैं। उनके दादा छेद्दा सिंह एक किसान हैं और बीते कई साल से गेंदे के फूल की खेती कर रहे हैं। इस साल जब लॉकडाउन के चलते छेद्दा सिंह की फूलों की सारी फसल बर्बाद होने लगी तो कुणाल ने अपने दादा की मदद के लिए एक बेहद मासूम प्रयास किया। कुणाल ने एक बर्बाद होते फूलों का एक वीडियो बनाया और टिकटॉक पर इसे साझा करते हुए कहा, ‘देखिए भाइयों देखिए। किसानों को खेत से बाहर कैसे फेंकना पड़ रहा है गेंदा। किसानों का कोरोना वायरस की वजह से बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है। इसीलिए इस वीडियो को लाइक और शेयर करके आगे बढ़ाएं।’ भरपूर मासूमियत और बेहद उत्साह के साथ कुणाल बताते हैं कि उनका ये वीडियो अब तक 125 लोगों ने देख लिया है। यह पूछने पर कि उन्होंने यह वीडियो क्यों बनाया, वे पूरे आत्मविश्वास के साथ कहते हैं, ‘ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग जान सकें कि कोरोनावायरस के कारण किसानों को कितना नुकसान हो रहा है।’ जिस नुकसान का जिक्र कुणाल कर रहे हैं उसकी मार इन दिनों मेरठ की सरधना तहसील के सैकड़ों किसान झेल रहे हैं। यहां लावड कस्बे में सब्जियों और फूलों की अच्छी...
कल यानी शुक्रवार, 24 अप्रैल को चांद दिखने के बाद आज से रमजान महीने की शुरुआत हो गई है। 23 अप्रैल को साउदी अरब में चांद दिखने पर वहां रमजान महीना शुरू हो गया है। कोरोना संक्रमण के कारण जारी लॉकडाउन में मुस्लिमपहली बार तरावीह की नमाज घरमें ही अदा करेंगे। तरावीह रमजान में पढ़ी जाने वाली खास नमाज को कहते हैं।सऊदी अरब सरकार ने मक्का-मदीना बंद कर रखा है। इस कारण वहांउमराह के लिए भी लोग नहीं जा सकेंगे। जून-जुलाई में हज के निरस्त होने की भीआशंका है। 25 अप्रैल यानी आज से एक महीने तक रोजे रखकरपांचवक्त की नमाज व तरावीह घर पर ही पढ़ी जाएंगी। लॉकडाउन व सोशल डिस्टेंसिंग के कारण मसजिदों में नमाज पढ़ने पर रोक लगी है। इस महीने रोजेदार करीब 15 घंटे भूखे-प्यासे रहकर इबादत करेंगे। रमजान के खास दिनशब-ए-कद्र 20 मई को औररमजान का अलविदा जुमा 22 मई को रहेगा। चांद दिखने पर ईद-उल-फितर 24 या 25 मई को मनाया जाएगा। तीस दिन तक अदा की जाएगी तरावीह की नमाज हर मुसलमान को दिन में 5 बार नमाज पढ़ने का नियम है, लेकिन रमजान में 6 बार नमाज पढ़ी जाती है। छठी नमाज रात में होती है, इसे ही तरावीह कहा जाता है। इस नमाज में हर ...
दुनिया कोरोनावायरस संकट से जूझ रही है। कोराेना के खिलाफ कोई कारगर दवा अभी तक नहीं है।ऐसे में सिर्फ एक दवा हाइड्रोक्सी-क्लोरो-क्विन (एचसीक्यू) की सबसे ज्यादा चर्चा है। केंद्र सरकार ने 25 मार्च को इसके निर्यात पर बैन लगा दिया था। बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति की मांग पर बैन हटाया गया। सिर्फ अमेरिका ही नहीं, दुनिया के कई देश भारत से इस दवा की मांग कर रहे हैं। यह दवा कोरोना की नहीं, बल्कि मलेरिया की है। शुरुआती स्तर पर अभी तक कोरोना के संक्रमण और लक्षणों को कम करने में इसे सबसे ज्यादा प्रभावी माना जा रहा है। हालांकि,शनिवार को देश के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि यह दवा किसको और कितनी देनी है, इस बारे में वह कोई अनुशंसा नहीं करता है। साथ ही यह भी कहा कि बिना डॉक्टर की सलाह के यह दवाई न ली जाए। पिछले 76 साल से भारत में एंटी मलेरिया और रूमेटाइड अर्थराइटिस के उपचार में उपयोग की जा रही इस दवाई की अचानक से बाजार में किल्लत हो गई है। सबसे पहले बड़े पैमाने पर दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान इस दवा का उपयोग हुआ था। यह टैबलेट मूल रूप से इम्यून पॉवर को बढ़ाती है। भारत ने 13 देशों के लिए अपना...
इन दिनों गंगा-यमुना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तैर रहे हैं। सुखद आश्चर्य के साथ लोग इन वीडियो में बता रहे हैं कि कैसे देश भर में हुए लॉकडाउन के बाद इन नदियों का पानी स्वतः ही बेहद साफ नजर आने लगा है। दिल्ली तक आते-आते जो यमुना पूरी तरह से गंदा नाला दिखने लगती है, इन दिनों फिर से नदी लगने लगी है। ऐसे ही गंगा भी इन दिनों इतनी साफ लगने लगी है कि ऋषिकेश-हरिद्वार तक तो उसके पानी को पीने योग्य बताया जाने लगा है। उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की हालिया रिपोर्ट बताती है कि ऋषिकेश के लक्ष्मण झूला क्षेत्र में इन दिनों गंगा के पानी में फ़ीकल कॉलिफोर्म (मानव मल) की मात्रा में 47 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं ऋषिकेश में बैराज से आगे यह कमी 46 प्रतिशत, हरिद्वार में बिंदुघाट के पास 25 प्रतिशत और हर की पौड़ी पर 34 प्रतिशत दर्ज की गई है। इस रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है लॉकडाउन के दौरान हर की पौड़ी पा गंगा का पानी ‘क्लास-ए’ स्तर का हो चुका है। यानी इसे ट्रीट किए बिना ही सिर्फ़ क्लॉरिनेशन करके भी पिया जा सकता है। ऐसे में यह सवाल बेहद प्रासंगिक लगता है कि गंगा-यमुना सफ़ाई के नाम पर खर्च हो चुक...
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