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ड्रोन अब तक आंख कान थे लेकिन अब हाथ भी, 13 राज्यों में 700 से ज्यादा ड्रोन कर रहे हैं निगरानी और दवा छिड़कने का काम

ड्रोन अब तक आंख कान थे लेकिन अब हाथ भी बन गए हैं। ड्रोन के जरिए पुलिस न सिर्फ मॉनिटरिंग कर रही है बल्कि कई जगह दवा का छिड़काव भी किया जा रहा है।खास बात ये है किबड़ी संख्या में ऐसे ड्रोन पायलट एकजुट हुए हैं, जो बिना कोई चार्ज लिए पुलिस और प्रशासन के लिए ड्रोन ऑपरेट कर रहे हैं।देशभर में 1400 से ज्यादा लोगों ने अपने ड्रोन पुलिस की मदद के लिए इस्तेमाल करने की इच्छा जताई है। हालांकि अभी करीब 720 ड्रोन से ही मॉनिटरिंग की जा रही है। सिर्फ गुजरात में ही 160 निजी ड्रोन काम पर लगे हुए हैं।

जहां आदमी नहीं जा सकते, वहां ड्रोन पहुंच रहे हैं और पुलिस, प्रशासन के मददगार बन रहे हैं। आसमान में उड़ने वाले ये ड्रोन पुलिस की आंख, कान और हाथबने हुए हैं।

गुजरात में मार्च से ही ड्रोन के जरिए निगरानी शुरू हो गई थी।

गुजरात से शुरू हुआ इनिशिएटिव

ड्रोन पायलट मुफ्त में सरकार की मदद के लिए आगे आए हैं।

मार्च महीने में गुजरात के अहमदाबाद में 'इंडियन ड्रोन कोड' के नाम से एक इनिशिएटिव शुरू किया गया।

इस इनशिएटिव को शुरू करने वाले निखिल मेठिया ने बताया कि, हमाराड्रोन लैब के नाम से स्टार्टअप है। कोरोनावायरस के फैलने पर हमने अहमदाबाद पुलिस को फ्री में ड्रोन के जरिए मॉनिटरिंग और सर्विलांस करने का प्रपोजल दिया।उन्होंने तुरंत सहमति दी।

इसके बाद हमने 'इंडियन ड्रोन कोड' नाम से ऑनलाइन इनिशिएटिव लिया और राज्यभर के ड्रोन पायलट से इससे जुड़ने की अपील की। हमने वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम, फेसबुक पर मैसेज फैलाया। हमारे कॉन्टेक्ट में जो ड्रोन ऑपरेटर, मैन्यूफैक्चरर थे, उन्हें जोड़ा और उनसे उनके एरिया के ड्रोन पायलट को जोड़ने की अपील की।

गुजरात में हमें 360 लोग मिल गए। ये वे लोग हैं, जिनके पास खुद के ड्रोन हैं और जो सरकार की मदद करने के लिए तैयार हैं। 360 में से अभी 160 ड्रोन ऑपरेशन में हैं।

पुलिस को दे रहे लाइव फुटेज
हम ड्रोन के जरिए अलग-अलग शहरों से पुलिस को लाइव फुटेज दे रहे हैं। अहमदाबाद में एक ड्रोन के जरिए दवा का छिड़काव भी किया जा रहा है।

ड्रोन के जरिए पुलिस को लाइव फुटेज मिलते हैं।

थर्मल ड्रोन के जरिए दूर से ही लोगों का टेम्प्रेचर लिया जा रहा है। जिसका टेम्प्रेचर सामान्य से ज्यादा आता है, उसे संदिग्ध मानकर उसकी स्क्रीनिंग की जाती है।

निखिल कहते हैं कि, आमतौर पर एक ड्रोन को तीन से चार घंटे एक दिन में रन किया जाता है तो इसका चार्ज 5 हजार रुपए आता है।लेकिन अभी यह काम फ्री में किया जा रहा है। हालांकि गुजरात पुलिस ने सभी ड्रोन पायलट्स को रिवॉर्ड देने की बात कही है।

देश के 13 राज्यों तक पहुंचा इनिशिएटिव
गुजरात से शुरू हुआ यह इनिशिएटिव देश के 13 राज्यों तक पहुंच चुका है।

ड्रोन के जरिए सोशल डिस्टेंसिंग को भी फॉलो करवाने में मदद मिल रही है।

इनमें महाराष्ट्र (93), मप्र (13), केरल (48), ओडिशा (46), आंध्रप्रदेश (38), तेलंगाना (17), तमिलनाडु (12), दिल्ली (81), पंजाब (160), मणिपुर (7), हरियाणा (34) और राजस्थान में (9) ड्रोन ऑपरेट किए जा रहे हैं।देशभर से 1400 ड्रोन पायलट रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं। अभी करीब 718 ड्रोन देशभर में ऑपरेट हो रहे हैं।

दिल्ली में सब्जी मंडी पर ड्रोन से रखी जा रही नजर

स्टार्टअप, सरकारी एजेंसियों के साथ ही मीडिया द्वारा भी ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है।ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीएफआई) के निदेशक स्मित शाह ने पीटीआई को बताया कि, सरकार के साथ रजिस्टर्ड 20 हजार ड्रोन में से 450 से 500 ड्रोन पहले से ही अलग-अलग सरकारी एजेंसियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

शाह ने कहा कि, ड्रोन स्टार्टअप सरकार के सपोर्ट में आए हैं, वे बिना किसी चार्ज के लिए सेवाएं दे रहे हैं।दिल्ली पुलिस गाजीपुर मंडी, आजादपुर मंडी में ड्रोन के जरिए निगरानी रखती है। यहां दिनभर खरीददार आते हैं।

तेलंगाना के वारंगल नगर निगम द्वारा निजी कंपनी से करार किया गया है।कंपनी सर्विलांस के साथ शहर को प्रदूषण मुक्त करने का काम भी ड्रोन के जरिए कर रही है।मदुरई नगर निगम भी हॉस्पिटल्स को संक्रमण मुक्त करने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर रही है।

क्या प्राइवेसी का हो रहा उल्लंघन

मेठिया कहते हैं कि, निजता एक बड़ा मुद्दा है। इसलिए हम यूजर्स का डाटा खुद स्टोर नहीं करते। यह सिर्फ पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के पास होता है।उन्हीं के मेमोरी कार्ड इस्तेमाल किए जा रहे हैं। हम पायलट्स को कह चुके हैं कि निजी मेमोरी कार्ड का इस्तेमाल नहीं करना है।पायलट्स को रेंज ऑफ साइट (आंखों की जहां तक देखने की क्षमता हो) तक ही ड्रोन उड़ाने को कहा गया है।



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Drones were eye and ear till now, more than 700 drones are monitoring and spraying drugs in 13 states


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