Skip to main content

अब हमें अपने बेटों के फोन नहीं आते, चिटि्ठयां भी नहीं मिलतीं लेकिन वो हमेशा साथ हैं, लेकिन मेरी तरह की मांएं जो सांस लेती हैं तो हर सांस में जी रहा होता है उनका बेटा

मेघना गिरीश, जम्मू के नगरोटा आतंकी हमले में शहीद हुए मेजर अक्षय गिरीश की मां हैं। 2016 में अपने बेटे को खोने के बाद वह ऐसी कई मांओं से मिली हैं जिन्होंने उन्हीं की तरह अपने बेटे को खोया है, 'लाइन ऑफ ड्यूटी' में। शहीदों के परिवारों से मिलने वह नॉर्थ से लेकर साउथ तक घूमी हैं, मेघना इसे तीर्थयात्रा कहती हैं। मदर्स डे पर ऐसे ही कुछ शहीदों की माओं से हमारी वर्चुअल मुलाकात करवा रही हैं मेघना गिरीश, पढ़िए-

जब मेरा बेटा अक्षय छोटा था तो मैं प्यार से उसे लोरी सुनाती थी, ‘चंदा है तू मेरा सूरज है तू...।’ और अक्षय मुस्कुरा देता, गले लग जाता मेरे। बड़ा हुआ तब भी कहा था, ‘अभी भी आप ही का राजा बेटा हूं।’ जब पिता बना तब भी उसे याद था, कहता था, ‘मां आप मेरे लिए वो गातीं थीं ना....वो गाना मेरा है।’

अक्षय बड़ा होकर मेजर अक्षय गिरीश बन गया और फिर 29 नवंबर 2016 को एक नेशनल हीरो। तब, जब वह जम्मू कश्मीर के नगरोटा में हुए जैश ए मोहम्मद के आतंकी हमले के दौरान क्यूआरटी यानी क्विक रिएक्शन टीम को लीड कर रहा था।

अपने राजा बेटे अक्षय की तस्वीर के साथ ये है उनकी मम्मी मेघना की तस्वीर।

पाकिस्तानी आतंकी चार जवानों को मारकर सेना के रेसिडेंशियल इलाके में घुस आए थे। जहां बच्चे, महिलाएं और बिना हथियार कितने ही सैनिक थे। पूरी तरह सुबह भी नहीं हुई थी जब अक्षय की टीम ने अदम्य साहस दिखाया और मासूम जिंदगियों को उन आतंकियों से बचाया। बतौर अक्षय की मां मैं हमेशा यही कहूंगी कि, जिस बहादुरी से अपनी परवाह किए बिना उसने उन मासूम जिंदगियों को बचाया इसका हमें गर्व है।

देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर हमारी तरह के बाकी पैरेंट्स से मिलना बेहद भावुक कर देता है। लेकिन, ये काफी सुकून देने वाला और कई मायनों में इंस्पायरिंग भी है। मेरी पहली मुलाकात उधमपुर में आशा गुप्ता से हुई। जब हम पहली बार गले मिले तो बिना कुछ बोले, खुद ब खुद हमारी आंखें नम हो गईं। पैरा स्पेशल फोर्स के यंग कैप्टन तुषार महाजन फरवरी 2016 में कश्मीर के पाम्पोर में एक सरकारी बिल्डिंग में फंसे कई लोगों की जान बचाने के बाद उन्होंने देश के खातिर अपनी जान दे डाली। तुषार के घर जाकर मालूम हुआ कि उनके हीरो शहीद भगत सिंह थे। आशा और मैं पिछले तीन सालों से अपना दुख साझा कर रहे हैं।

बेंगलुरुमें हमारे घर से थोड़ी ही दूर पर मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के पेरेंट्स रहते हैं। संदीप ने ताज होटल मुंबई में कई टूरिस्ट की जान बचाई थी, अपनी जान की कीमत पर। आज वह लीजेंड बन चुका है।

धनलक्ष्मी अक्का, मेजर संदीप की खूबसूरत मां की बातों से पता चलता है, अक्का हर वो कुछ करना चाहती हैं जो संदीप चाहता था। उन्होंने साइकिल चलाना सीखा, बैंक का काम भी। संदीप के मम्मी पापा कई ऐसे युवाओं से भी मिले जो उनके बेटे से इंस्पायर्ड और मोटीवेटेड थे। वह कहती भी हैं, ‘जब लोग कहते हैं आपका एक ही बेटा था और आपने उसे आर्मी में जाने दिया, तो मैं कहती हूं ये सारे बच्चे भी मेरे हैं।’

पहली बार जब मैं मेजर मोहित शर्मा के घर दिल्ली गई तो उस दिन मोहित का बर्थडे था। उसकी मम्मी सुशीला जी ने सुबह से कुछ नहीं खाया था और तो और वह कमरे से बाहर ही नहीं निकली थीं। मार्च 2009 में मेजर मोहित और उनकी स्पेशल फोर्स की टीम कश्मीर के कुपवाड़ा में एक आतंकी ऑपरेशन का हिस्सा थी। मोहित ने अदम्य साहस से मुकाबला किया, खुद कुर्बान होने से पहले उन्होंने चार आतंकियों को मार गिराया और अपने दो साथियों को बचा भी लाए।

जब सुशीला जी ने हिम्मत बटोरी और बाहर हमसे मिलने आईं तो हमें उनके दुख का एहसास हो रहा था, लेकिन वह यही कोशिश कर रहीं थी कि हम असहज महसूस न करें। उस शाम के खत्म होने से पहले, मोहित की शरारतों, शौर्य और दीवानगी की कहानियां सुनकर हम दो परिवार एक बन चुके थे। गर्व और दर्द में हिस्सेदारी जो थी हमारी। खुशी हुई जब पता चला कि पिछले साल एक मेट्रो स्टेशन का नाम इस वीर के नाम पर रखा है।

तस्वीर अक्षय की पॉसिंग ऑउट परेड की है। बेटे को फौजी बनते देखा तो लगा जैसे कोई युद्ध जीता हो।

लेफ्टिनेंट त्रिवेणी सिंह अशोक चक्र पर उस वक्त क्यूआरटी को लीड करने का जिम्मा था, जब 2004 में आतंकियों ने जम्मू रेलवे स्टेशन पर हमला किया और 7 लोगों की हत्या कर दी। लेफ्टिनेंट त्रिवेणी ने आतंकियों का पीछा किया और जान गंवाने से पहले दो को मार गिराया। मैं उनकी मां पुष्पलता के साथ किचन में आ गई और वह अपने बेटे की बातें सुनाते हुए हमारे लिए चाय बनाने लगीं।

वो बोलीं, ‘त्रिवेणी को तो काम करने की जरूरत ही नहीं थी। इतनी प्रॉपर्टी, लीची के बागीचे....लेकिन बचपन से ही उसको पैसों से नहीं, लोगों से प्यार था। शादी की पूरी तैयारी हो चुकी थी, मेन्यू डिसाइड हो रहा था जब हमें खबर मिली।’ उनके लिए अपना गम, गरिमा के पीछे छिपा पाना नामुमकिन हो रहा था। बाहर गेट पर जब हमनें पूछा कि क्या वो अक्षय की कार के साथ फोटो खिंचवाएंगी तो मां बोलीं, ‘हमारे भी बच्चे की कार है’, फिर अक्षय की कार पर हाथ रखकर बोलीं, ‘कितने प्यारे, निडर और दिलेर थे हमारे शेर बच्चे।’

हम उस दिन करगिल के पहले हीरो कैप्टन सौरभ कालिया की फैमिली से मिलने जा रहे थे। सौरभ की मम्मी हैं विजया दीदी। उन्होंने मुझे गले से लगाया और बोलीं, ‘मेरा बड़ा मन था आपसे मिलने का...विकास को भी कई बार बोला, अच्छा हुआ आप लोग आए।’ विजया दीदी सौरभ की कई कहानी सुनातीं हैं। कहने लगीं, ‘एक बार फैमिली में कोई गुजर गए थे, तो लोगों को रोते और उदास देखकर सौरभ बोला, मम्मी ये क्या है, डेथ तो कलरफुल होनी चाहिए...जब सौरभ शहीद हुआ तो लोगों की भीड़ किलोमीटर लंबी थी, सब चिल्ला रहे थे, भारत माता की जय और सौरभ अमर रहे।’ उनकी बातें सुनकर मेरा गला भर आया और आंसुओं को आंखों में रोके रखना बेहद मुश्किल था।

23 साल के सिपाही विकास डोगरा रेजिमेंट के उन 18 सैनिकों में से एक थे जो 2015 में मणिपुर में शहीद हुए। उनकी बस पर यूनाइटेड लिब्रेशन फ्रंट के उग्रवादियों ने हमला किया था। आपने यदि उरी मूवी देखी है तो याद होगा फिल्म की शुरुआत मएक एम्बुश से होती है। जिसका हमारे सैनिक जवाब देते हैं। हिमाचल के एक गांव में विकास के पेरेंट्स रहते हैं। उनकी ज्यादा उम्र भी नहीं, आंखें दर्द से नम और उनकी बातें गुमसुम। विकास की मां, पिता और दादी को समझाती हैं, फिर अपनी बेटी की चिंता करते हुए कहती हैं, ‘बहन को भाई के जाने का बहुत दुख है, हमारी तो जिंदगी यूं ही कट जाएगी, पर उसे भाई का प्यार कहां से मिलेगा।’

कैप्टन सौरभ कालिया की मां विजया दीदी से मिलकर सौरभ की कहानियां सुनी थीं, वक्त कैसे गुजर गया पता नहीं चला।

हममें से कितने लोग मेजर सुधीर वालिया के बारे में जानते हैं? इंडिया के रैंबो रियल हीरो हैं वह। 4 जाट रेजिमेंट के मेजर सुधीर वालिया श्रीलंका में पीस कीपिंग फोर्स का हिस्सा थे। उन्होंने पैरा स्पेशल फोर्स को चुना, करगिल युद्ध लड़े, सेना प्रमुख जनरल वेद मलिक के एडीसी चुने गए, दो बार सियाचिन ग्लेशियर पर पोस्टेड रहे और जम्मू कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ कई ऑपरेशन्स को अंजाम दिया।
किसी वक्त में जोश से सराबोर रहनेवाली उनकी मां अब बोल भी नहीं पातीं और चलना फिरना भी बंद है। उनके दिमाग में खून के थक्के जम गए थे और फिर स्ट्रोक। मैंने जब कहा, ‘आप तो शेर की मां हैं’, तो उनकी आंखों में चमक थी, उन्होंने सिर हिलाकर हामी भी भरी और मेरी हथेली को अपनी मुट्‌ठी में भींच लिया।

मेजर शिखर के पेरेंट्स अरविंद कुमार और पूनम थापा हैं। उनकी मां कहती हैं, ‘क्या करें जीना तो पड़ेगा, जब मैं सुवीर (अपने पोते) को देखती हूं तो और बुरा लगता है। कम से कम हम पेरेंट्स को शिखर के साथ 30 साल मिले, बहन के 24 साल और बीवी को 2 साल, लेकिन बेचारे इस बच्चे को तो पिता का प्यार बस 2 महीने ही नसीब हुआ।’ शिखर की पत्नी सुविधा ने अपने पति के नक्शे कदम पर चलने का फैसला किया। वह ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी में वह कैडेट है। और बेटा सुवीर अपने दादा दादी के पास।

वैसे तो सभी हीरो और उनके बहादुर पेरेंट्स के साथ मैं न्याय नहीं कर सकी हूं। लेकिन कैप्टन अनुज नैय्यर, मेजर पी आचार्य, कैप्टन अमोल कालिया, कैप्टन उदयभान सिंह, कैप्टन देविंदर सिंह जस, राइफलमैन सोहनलाल, कैप्टन अमित भारद्वार, कैप्टन पवन कुमार, नायक चितरंडन देबारम, मेजर कुनाल गोसावी, कांस्टेबल एच गुरू, फ्लाइट लेफ्टिनेंट समीर अबरोल, सिपाही रविकांत ठाकुर उनमें से हैं जो मेरी ताकत का हिस्सा रहेंगे और उनकी बदौलत हमारे देश का झंडा उंचा।

हाल ही में हंदवाड़ा एनकाउंटर में हमने 5 वीरों को खो दिया, मातृभूमि की रक्षा करते, अधर्म से धर्म का युद्ध चलता रहेगा। हर वो युवा सैनिक जो युद्ध भूमि में धोखेबाज दुश्मन से मुकाबले को दाखिल होता है, यह जानकर कि उसका लौटना असंभव है, आज का अभिमन्यु है। अभिमन्यु की तरह उनमें काबीलियत है हिम्मत और शौर्य भी, दुश्मन के चक्रव्यूह में घुसने और उसे तोड़ने का।

हां वह मारे गए हैं लड़ते हुए, लेकिन उनकी महिमा हमेशा जिंदा रहेगी। इन शहीद सैनिकों को सैल्यूट कर और उनके खूबसूरत और अद्भुत परिवारों से मिलकर हमारी जिंदगी और ज्यादा अमीर और सार्थक हो गई है।

अब हमें अपने उन बेटों के फोन नहीं आते, चिटि्ठयां भी नहीं मिलतीं लेकिन वो हमेशा हमारे साथ हैं। आश्चर्य लगेगा लेकिन मेरी तरह की मांएं जो सांस लेती हैं तो हर सांस में जी रहा होता है उनका बेटा। वो अपने भाई बहनों के जरिए भी जिंदा रहते हैं, और हां अगर शादी शुदा हैं तो पत्नी और बच्चों में भी। एक मां आसपास के बच्चों में अपने बेटे को देखती है। मुझे लगता है, ‘हम सब के चंदा और सूरज जैसे बच्चे अब एक साथ गगन के तारों में चमकते हैं।’

मेरी ओर से आप सभी को हैप्पी मदर्स डे। ऊपर वाला आपके परिवारों को खुशी और साथ दे, हमेशा। मैं उम्मीद करती हूं आप आजादी और सुरक्षा के लिए लड़नेवाले हमारे सैनिकों के लिए गर्व और सम्मान महसूस करते होंगे।

जय हिंद की सेना। जय हिंद।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
2017 की बात है, अक्षय का बर्थडे था, मुझे रोता देख मेजर संदीप उन्नीकृष्णन की मां धनलक्ष्मी ने मुझे ऐसे संभाला था। (साड़ी में मेजर उम्मीकृष्णन की मां और उनके बगल में सूट पहने मेघना गिरीश)


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3bfIKj3
via IFTTT

Comments

Popular posts from this blog

कोरोना के चलते वर्क फ्रॉम होम का आदेश हुआ, तो नासा के वैज्ञानिक 19 हजार करोड़ रुपए का क्यूरोसिटी मार्स रोवर अपने घर से चला रहे

अगर आपको घर से काम करना कठिन लगता है, तो अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के वैज्ञानिक आपके लिए मिसाल बन सकते हैं। वे मंगल ग्रह की जानकारी जुटाने वाले 18,750 करोड़ रुपए से ज्यादा की कीमत वाले ‘क्यूरोसिटी मार्स रोवर‘ को अपने घर से चला रहे हैं। इससे मार्स रोवर के काम में कोई रुकावट नहीं आई है और वह अब भी मंगल ग्रह से जुड़े आंकड़े और तस्वीरें इकट्‌ठा कर रहा है। हालांकि टीम को थोड़ी मुश्किल हो रही है क्योंकि सभी को एक साथ 15 चैट चैनल्स पर भी नजर रखनी पड़ती है। लेकिन, फिर भी अपनी और परिवार की सुरक्षा के लिए वे घर से ही काम करना पसंद कर रहे हैं। ट्रेंड: वर्क फ्रॉम होम की नौकरी तलाशने वाले60% तक बढ़े जॉब पोर्टल मॉन्स्टरके मुताबिक, वर्क फ्रॉम होम जॉब्स तलाशने वालों की संख्या में पिछले कुछ समय में 60% तक का इजाफा हुआ है। वहीं गूगल ट्रेंड्स भी बताता है कि लॉकडाउन के दौरानवर्क फ्रॉम होम से जुड़ी सर्च में इजाफा हुआ है। जनवरी की तुलना में इसे मार्च में 82% तक ज्यादा सर्च किया गया। रिसर्च फर्म गार्टनर के मुताबिक, दुनिया में 2030 तक घर से काम करना 30% बढ़ जाएगा, क्योंकि जनरेशन-जेड वर्कफोर्स में आ जाएगी। 64% पेश...

92 साल के भवानी शंकर शर्मा ने संक्रमण से ठीक होने पर कहा- कभी नशा नहीं किया, पैदल चलने और मेरी जीवटता ने ही मुझे नई जिंदगी दे दी

ये हैं 92 साल के भवानी शंकर शर्मा। इन्होंने न सिर्फ कोरोना को हराया है बल्कि, जिंदगी जीने की सबसे खूबसूरत तस्वीर भी दिखाई। 28 अप्रैल को कोरोना संक्रमण से पूरी तरह मुक्त होकर वे फिलहाल घर में क्वारैंटाइन की गाइडलाइन फॉलो कर रहे हैं। इस उम्र में ऐसा क्या था जो उनकी मजबूत इच्छाशक्ति को जगाए था? आइए जानते हैं उन्हीं की जुबानी। 'मैं अगर ठीक होकर लौटा हूं तो उसकी वजह सिर्फ मेरा परिवार है। क्योंकि, मेरे सब यार-दोस्त अलविदा कह चुके हैं, इच्छाएं अब उड़ान की रही नहीं। बस, परिवार में खुद को देखना चाहता था। मुझे परिवार में लौटना था। उम्र के हिसाब से तो मुझे ऊपर वाले से कोई शिकायत नहीं। बस एक बार परिवार से मिलना चाहता था...मेरे दोनों बेटे रिटायर्ड डॉक्टर, इंजीनियर हैं। उन्हीं के बीच अंतिम सांस लेने की इच्छा थी।' 'यही प्रार्थना ऊपर वाले से करके सबकुछ उस पर छोड़ दिया। मैं और कर भी क्या सकता था? कोरोना संक्रमण कैसे हुआ इसका तो मेरे पास कोई जवाब नहीं, लेकिन यह जरूर याद है कि 13 से 28 अप्रैल तक एसएमएस स्थित कोरोना इलाज केंद्र में दिन कैसे बीते, पता ही नहीं चला। इलाज के दौरान मैंने खुद को कम...

92 साल के भवानी शंकर शर्मा ने संक्रमण से ठीक होने पर कहा- कभी नशा नहीं किया, पैदल चलने और मेरी जीवटता ने ही मुझे नई जिंदगी दे दी

ये हैं 92 साल के भवानी शंकर शर्मा। इन्होंने न सिर्फ कोरोना को हराया है बल्कि, जिंदगी जीने की सबसे खूबसूरत तस्वीर भी दिखाई। 28 अप्रैल को कोरोना संक्रमण से पूरी तरह मुक्त होकर वे फिलहाल घर में क्वारैंटाइन की गाइडलाइन फॉलो कर रहे हैं। इस उम्र में ऐसा क्या था जो उनकी मजबूत इच्छाशक्ति को जगाए था? आइए जानते हैं उन्हीं की जुबानी। 'मैं अगर ठीक होकर लौटा हूं तो उसकी वजह सिर्फ मेरा परिवार है। क्योंकि, मेरे सब यार-दोस्त अलविदा कह चुके हैं, इच्छाएं अब उड़ान की रही नहीं। बस, परिवार में खुद को देखना चाहता था। मुझे परिवार में लौटना था। उम्र के हिसाब से तो मुझे ऊपर वाले से कोई शिकायत नहीं। बस एक बार परिवार से मिलना चाहता था...मेरे दोनों बेटे रिटायर्ड डॉक्टर, इंजीनियर हैं। उन्हीं के बीच अंतिम सांस लेने की इच्छा थी।' 'यही प्रार्थना ऊपर वाले से करके सबकुछ उस पर छोड़ दिया। मैं और कर भी क्या सकता था? कोरोना संक्रमण कैसे हुआ इसका तो मेरे पास कोई जवाब नहीं, लेकिन यह जरूर याद है कि 13 से 28 अप्रैल तक एसएमएस स्थित कोरोना इलाज केंद्र में दिन कैसे बीते, पता ही नहीं चला। इलाज के दौरान मैंने खुद को कम...

अमेरिका में कोरोना के कारण 1.7 करोड़ लोगों के सामने भोजन संकट; 60 हजार एजेंसियां, दो लाख वॉलंटियर्स खाना पहुंचा रहे

अमेरिका कोरोना से दुनिया में सबसे ज्यादा प्रभावित देश है। यहां 13 लाख से ज्यादा मामले आ चुके हैं। 80 हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। यहां कोरोना की वजह से दो महीने में करीब 1.7 करोड़ लोगों के सामने खाने का संकट आ गया है। दो महीने में यह संख्या करीब 46% बढ़ी है। जबकि अमेरिका में कोरोना और अन्य कारणों से भूखे रहने वाले लोग साढ़े पांच करोड़ हो चुके हैं। ऐसे में फूड सिक्योरिटी और भुखमरी पर काम करने वाला राष्ट्रीय संगठन फीड अमेरिका लोगों तक खाना पहुंचा रहा है। फीड अमेरिका की सीईओ कैटी फिजगेराल्ड ने कहा कि कोरोना के बढ़ते मामलों को देखकर लगता है कि हालात हमारे नियंत्रण से बाहर हो गए हैं। ऐसी स्थिति में कोई भी खाद्य सुरक्षा के संकट में पड़ सकता है। स्थिति भयानक हो सकती है। अमेरिका में 3.7 करोड़ लोग खाने के संकट से जूझ रहे थे ऐसे लोगों की तादाद भी बढ़ रही है, जिनके सामने खाने-पीने का संकट पैदा हो गया है। कोरोना से पहले अमेरिका में 3.7 करोड़ लोग इस संकट से जूझ रहे थे। कोरोना, बेरोजगारी की वजह से महज दो महीने में इसमें 1.7 करोड़ लोग और जुड़ गए। यानी अभी करीब साढ़े पांच करोड़ लोग संकट में ह...

मोदी बोले- 22 साल पहले पोखरण में किया गया परमाणु परीक्षण अभूतपूर्व उपलब्धि थी, आज वैज्ञानिक तकनीक की मदद से कोरोना को हराने में जुटे

आज राष्ट्रीय तकनीक दिवस है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के वैज्ञानिकों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि 1998 में पोखरण में किया गया परमाणु परीक्षण एक अभूतपूर्व उपलब्धि थी। आज जब देश में कोरोनावायरस का संकट है, तब भी वैज्ञानिक तकनीक की मदद से महामारी को हराने में जुटे हैं। 11 मई 1998 को अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में पोखरण में भारत ने परमाणु परीक्षण किया था। मोदी ने ट्वीट किया, ‘‘आज राष्ट्रीय तकनीक दिवस के मौके पर पूरा देश उन लोगों को सैल्यूट करता है जो तकनीक के दम पर हमारी जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लेकर आए। हमें 1998 की पोखरण की वो उपलब्धि याद है। वह भारत के इतिहास का यादगार पल था। उस परीक्षण ने दिखाया कि मजबूत राजनीतिक नेतृत्व एक बड़ा अंतर ला सकता है।’’ Today, technology is helping many in the efforts to make the world free from COVID-19. I salute all those at the forefront of research and innovation on ways to defeat Coronavirus. May we keep harnessing technology in order to create a healthier and better planet. — Narendra Modi (@narendramodi) May 11, 2020...

कोरोना की उजली तस्वीरः आबाद हो रहे उत्तराखंड के 1700 भूतिया गांव, 2 लाख से ज्यादा लोग लौट रहे हैं

पूरा देश कोरोना से जूझ रहा है, लेकिन कोरोना उत्तराखंड के लिए एक सकारात्मक खबर लाया है। जिन लोगों ने रोजगार के लिए वर्षों पहले अपने पहाड़ी गांव छोड़ दिए थे, वे अब लौट रहे हैं। ये वही लोग हैं, जिन्हें वापस लाने के प्रयास सरकार पिछले 10 साल से कर रही थी, लेकिन सफल नहीं रही थी। 10 सालों में राज्य के पर्वतीय जिलों से 5 लाख से ज्यादा लोग पलायन कर चुके हैं। ग्राम विकास एवं पलायन आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, 60 हजार लोगों की घर वापसी हो चुकी है। एक सप्ताह में डेढ़ लाख लोग और लौट आएंगे। इनका रजिस्ट्रेशन हो गया है। ये लोग फिर से पलायन न करें, इसके लिए सरकार ने जतन चालू कर दिए हैं। पूर्व सीएस इंदुकुमार पांडेय के नेतृत्व में हाईपावर कमेटी काम कर रही है। पलायन आयोग ने भी इनसे बात कर सरकार को सिफारिशें देना शुरू कर दी हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि पूरी तरह खाली हो चुके 1700 भूतिया गांव में से आधे फिर आबाद हो सकेंगे। दो लाख से ज्यादा लोग तो इस हफ्ते ही वापस आ जाएंगे। भविष्य में लॉकडाउन खुलते ही करीब इतने ही लोग और वापस आ सकते हैं। उत्तरकाशी के डीएम आशीष सिंह कहते हैं कि जिले में लौटे 5 हजार लोगों म...

7 देशों से 8 विमानों में भारतीयों की वापसी होगी; पहली फ्लाइट दोपहर 3 बजे दिल्ली पहुंचने की उम्मीद

कोरोना वायरस की वजह से विदेशों में फंसे भारतीयों को लाने के मिशन वंदे भारत का आज तीसरा दिन है। आज 7 देशों से 8 फ्लाइट आएंगी। ढाका से दिल्ली आने वाली फ्लाइट के सबसे पहले दोपहर 3 बजे लैंड होने की उम्मीद है। किस फ्लाइट में कितने लोग आएंगे, यह अभी साफ नहीं हो पाया है। इससे पहले मिशन के दूसरे दिन यानी शुक्रवार को चार उड़ानों से भारतीयों की वापसी हुई। आज की 8 फ्लाइट कहां-कहां से आएंगी? कहां से आएगी कहां पहुंचेगी पहुंचने का समय ढाका दिल्ली दोपहर 3 बजे कुवैत हैदराबाद शाम 6.30 बजे मस्कट कोच्चि रात 8.50 बजे शारजाह लखनऊ रात 8.50 बजे कुवैत कोच्चि रात 9.15 बजे कुआलालंपुर त्रिची रात 9.40 बजे लंदन मुंबई रात 1.30 बजे दोहा कोच्चि रात 1.40 बजे 8 मई को 5 उड़ानों से लोग भारत लौटे वंदे भारत मिशन के दूसरे दिन यानी 8 मई को पहली फ्लाइट दोपहर 12 बजे दिल्ली पहुंची। इस फ्लाइट में सिंगापुर से 234 लोग आए। दूसरी फ्लाइट ढाका से 167 मेडिकल स्टूडेंट को लेकर श्रीनगर आई। तीसरी फ्लाइट रियाद से कोझिकोड पहुंची। इसमें आने वाले लोगों की संख्या पता नहीं चल पाई। बहरीन से कोच...

भारतीय पायलट ने कहा- चीन में हमें शक की नजरों से देखते हैं, प्लेन से उतरने भी नहीं देते

(कुमुद दास) दुनियाभर के देशों में इन दिनों लॉकडाउन है।अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल पर प्रतिबंध है। ऐेसी स्थिति में भी कुछ पॉयलट रेस्क्यू अभियान, दवाइयां और जरूरी सामग्री अन्य देशों में पहुंचाने में जुटे हुए हैं। ऐसी ही 20 से ज्यादा फ्लाइट ले जा चुके कैप्टन अमरिंदर सिंह धालीवाल ने बताया किशंघाई की उड़ानों में सबसे ज्यादा समय लगता हैं। इसके बावजूद चीन पहुंचने पर वहां के लोगों का व्यवहार रूखा ही रहता है। उन्हें लगता है कि उनका देश तो महामारी से मुक्त हो चुका है। ऐसे में वे लोग विदेश से आने वाले हर शख्स को शक की निगाह से देखते हैं। उन्हें अंदेशा रहता है कि कहीं बाहर से आने वाला शख्स वायरस का संक्रमण लेकर तो नहीं आ रहा। हमें प्लेन से बाहर आने की इजाजत नहीं होती- धालीवाल कैप्टन धालीवाल ने बताया किवे 29 मार्च को ईरान से 136 लोगों को लेकर आए थे। इससे पहले वेचीन, खाड़ी देशों के अलावा ढाका, यांगून और मालदीव तक रिलीफ फ्लाइट्स ले जा चुके हैं। उन्होंने बताया किजब भी हमारी फ्लाइट शंघाई एयरपोर्ट पर उतरती है, तो सिर्फ एक कमर्शियल स्टाफ ही दस्तावेजों का लेन-देन करता है। हमें प्लेन से बाहर आने की इजाजत नहीं ह...

आईएनएस जलाश्व मालदीव से 698 भारतीयों को लेकर रवाना, इनमें 19 गर्भवती महिलाएं भीं; कल तक कोच्चि पहुंचने की संभावना

कोरोना महामारी की वजह से दुनियाभर में फंसे भारतीयों को हवाई और समुद्र मार्ग से घर लाया जा रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार ने 'वंदे भारत मिशन'और 'ऑपरेशन समुद्र सेतु'शुरू किया है। ऑपरेशन समुद्र सेतु के तहत सबसे पहले मालदीव से भारतीयों को लाया जा रहा है। माले से 698 भारतीयों को लेकर आईएनएस जलाश्व रवाना हो चुका है। इसके 10 मई को कोच्चि पहुंचने की संभावना है। आईएनएस जलाश्व के जरिए मालदीव से 595 पुरुष और 103 महिलाएं लौट रहे हैं। इनमें 19 गर्भवती महिलाएं भी हैं। नौसेना करीब 2000 लोगों को वापस लाने के लिए आईएनएस जलाश्व और आईएनएस मगर के जरिए ऑपरेशन चला रही है। दोनों युद्धपोत केरल के कोच्चि और तमिलनाडु के तूतीकोरिन से दो-दो बार माले जाएंगे। ऐसा बताया जा रहा है कि मालदीव से4500 लोगों ने भारत लौटने की इच्छा जताई है। मालदीव में करीब 27 हजार भारतीय रहते हैं। आईएनएस मगर रविवार को माले से निकलेगा मालदीवमें भारत के उच्चायुक्त संजय सुधीर ने बताया कि आईएनएस मगर रविवार को 200 भारतीय को लेकर तमिलनाडु के तूतीकोरिन जाएगा। फिर अगले हफ्ते माले फिर आएगा।सुधीर ने बताया कि आईएनएस जलाश्व गुरुवार ...

मोदी आज मुख्यमंत्रियों के साथ 5वीं बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से चर्चा करेंगे, केंद्र ने राज्यों से कहा- अब आर्थिक गतिविधियों को गति दें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सभीमुख्यमंत्रियों के साथ पांचवीं बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करेंगे। बैठक दोपहर 3 बजे से रात 8 बजे तक चलेगी, जिसमें सभी मुख्यमंत्रियों को बात रखने का मौका मिलेगा। लॉकडाउन का तीसरा फेज 17 मई को खत्म हो रहा है। ऐसे में मोदी मुख्यमंत्रियों से कोरोना से निपटने की रणनीति, लॉकडाउन की बंदिशें कम करने और आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने पर सुझाव मांग सकते हैं। दूसरी ओर, केंद्र सरकार का फोकस अब इकोनॉमी को गति देने के लिए राज्यों में कामकाज शुरू कराने पर है। कैबिनेट सचिव राजीव गौबा ने रविवार कोराज्यों केचीफ सेक्रेटरी (मुख्य सचिव) और हेल्थ सेक्रेटरी (स्वास्थ्य सचिव) से बात की थी।गौबा ने कहा कि अब राज्य सरकारों को आर्थिक गतिविधियां चालू करने पर जोर देना चाहिए। सरकार प्रवासियों के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चला रही है। सभी राज्य इसमें ज्यादा से ज्यादा सहयोग करें और वंदे भारत मिशन के तहत विदेशों में फंसे लोगों की लौटने में मदद करें। कई राज्यों ने रेड, ऑरेंज और ग्रीन जोन पर सवाल उठाए सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट सेक्रेटरी के साथ चर्चा में कई राज्यों ने रेज, ग्रीन और ऑरेंज जोन में ब...