Skip to main content

स्पेन में शुरुआत में संक्रमण दर 35% थी, टेस्ट और वेंटिलेटर बढ़ाकर यह दर 1% से कम कर दी

स्पेन दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा कोरोना प्रभावित देश है। यहां अब तक 2 लाख 68 हजार 143 मामले सामने आए हैं। 26 हजार 744मौतें हुई हैं। सरकार का कहना है कि उसकी हालात पर नजर है। उसने संक्रमण रोकने की पूरी कोशिश की है।

स्वास्थ्य मंत्री सल्वाडोर इला ने कहा, “देश में 14 मार्च को कोरोना का पहला मरीज मिला था। तब से रोज 35 फीसदी की दर से मरीज बढ़ रहे थे। ये घटकर अब 0.05% की दर से बढ़ रहे हैं। यह सब इसलिए संभव हो सका, क्योंकि लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग जैसे नियमों का उत्साह के साथ पालन किया।”

लोगों ने 2 महीने लॉकडाउन का सख्ती से पालन किया

इला ने कहा किदो महीने से जारी लॉकडाउन के दौरान लोग कम से कम घरों से निकले। स्वास्थ्यकर्मी अपने घर हीनहीं गए। लोगों ने हर दिन रात 8 बजे घरों की खिड़कियों के पास खड़े होकर स्वास्थ्यकर्मियों का उत्साह बढ़ाया। ये एक-दूसरे से दूर रहकर भी एक-दूसरे के साथ रहे।

देश भर में प्रति हजार लोगों पर 20 टेस्ट हुए

सबसे बड़ा कदम यह रहा कि देशभर में 9.50 लाख टेस्ट कराए गए। प्रति 1000 लोगों पर 20 टेस्ट किए गए। यह अन्य देशों की तुलना में ज्यादा हैं। शुरुआत में देश में वेंटिलेटर की कमी थी। वॉलंटियर्स की मदद से वेंटिलेटर का उत्पादन बढ़ाया। मैड्रिड और बार्सिलोना जैसे बड़े शहरों में करीब सभी अस्पतालों में आईसीयू बनाए गए। हालांकि, हालात जब तक संभल पाते, तब तक यहां के रिटायरमेंट होम्स में करीब 15 हजार यानी 56 फीसदी मौतें कोरोना से हो गईं।

सोशल हेल्थ सेक्टर के विशेषज्ञ एंटोनियो कैब्रेरा ने कहा, “रिटायरमेंट होम्स में सफाई नहीं की जा रही है। यहां तक कि अस्पतालों में कर्मचारियों को ठीक से सुरक्षा साधन नहीं मिल रहे हैं। कई लोगों के पास इलाज के लिए दस्तावेज नहीं थे। वे इलाज से पहले ही मारे गए।”

स्पेन में 2008 जैसी मंदी की आशंका

इधर, यूरोपीय संघ स्पेन की मदद कर रहा है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। स्पेन में कई लोगों की नौकरियां जा चुकी हैं। वे घर में रहकर पैसे नहीं कमा पा रहे हैं। यहां एक बार फिर 2008 जैसी मंदी आ सकती है। ऐसे में सरकार ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की तैयारी दिखाई है। प्रधानमंत्री पेंद्रो सान्चेज ने इस योजना को न्यू नार्मल नाम दिया है।

51 फीसदी लोगों को लॉकडाउन के पहले चरण का फायदा मिला

इसमें 4 चरणों में लॉकडाउन में छूट दी जा रही है। पहला चरण शुरू हो चुका है। इसका फायदा 51 फीसदी लोगों को मिल रहा है। ज्यादातर इलाकों में कुछ दुकानें और रेस्तरां खुल चुके हैं। लोग बाहर इंडिविजुअल स्पोर्ट्स खेल रहे हैं। दौड़ रहे हैं या साइकिल चला रहे हैं, वह भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए।

मंगलवार को समूहों में लोगों को वक्त बिताने का मौका मिला

सरकार ऐसे दिन भी तय कर रही है, जब परिवार या दोस्त 10-10 लोगों के समूह में कुछ समय साथ बिता सकेंगे। ऐसा पहला दिन यहां मंगलवार को बीता। हालांकि अभी मैड्रिड और बार्सिलोना में लॉकडाउन में ज्यादा ढील नहीं दी गई है। उन्हें एक हफ्ते और इंतजार करना होगा। वैसे यहां पार्कों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए जाने की छूट है। यहां संक्रमण की स्थिति देखने के बाद आगे का फैसला लिया जाएगा।

वैक्सीन बनने तक एहतियात बरतनाहोगा

दूसरा चरण 18 मई से शुरू होगा। हालांकि, इसका प्लान अभी तैयार नहीं है। अन्य चरणों की तारीखें और प्लान भी सरकार बना रही है। लेकिन सभी का एक ही मूलमंत्र यानी सतर्कता होगा। प्रधानमंत्री ने कहा है कि हमें तब तक कोरोना के बीच ऐहतियात से रहना होगा, जब तक कि इसका वैक्सीन नहीं बन जाता है। लॉकडाउन में ढील 4 चरण में दी जा रही, पहला चरण शुरू हो चुका है।



आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
स्पेन में लॉकडाउन में छूट का पहला चरण शुरू हो चुका है। इसमें लोगों को पार्क में घूमने और साइकिल चलाने की इजाजत दी गई। हालांकि, इस दौरान भी सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करना है। (फाइल)


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3cunrvn
via IFTTT

Comments

Popular posts from this blog

मुश्किल वक्त में मां ही सबसे मजबूत साबित होती है, कोरोना फैला और हिम्मत की सबसे ज्यादा जरूरत पड़ी तो बच्चों की ताकत बनकर लड़ीं दुनियाभर की माएं

सबसे पहले बात चीन के वुहान में हुई एक स्टडी की। जामा पीडिएट्रिक्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वुहान में 33 बच्चे संक्रमित मां से पैदा हुए थे। जिनमें से तीन को छोड़कर सभी स्वस्थ्य थे। जो तीन संक्रमित थे उनमें से 2 बच्चे 6 दिन के होने से पहले ही ठीक भी हो गए थे। इस रिपोर्ट का जिक्र इसलिए क्योंकि वुहान वह जगह है जहां से कोरोना संक्रमण की शुरुआत हुई। और वहां की ये रिसर्च बताती है कि मां मुश्किल वक्त में मजबूत साबित होती है। और अपनी हिम्मत से बच्चों की सुरक्षा करती है। मेडिकल साइंस ये बात माने या न माने ये तस्वीरें यही कहानी कह रही हैं... तस्वीर वियतनाम के हनोई शहर की है। यहां एक मां ने अपने छोटे बच्चे को कोरोना से बचाने के लिए शील्ड पैक कर दिया है। यहां अब तक कोरोना के सिर्फ 288 मरीज मिले हैं। अच्छी बात ये है कि यहां कोरोना ने अब तक किसी की जान नहीं ली। तस्वीर इंडोनेशिया के जावा शहर की है, जिसे 1 अप्रैल को खींचा गया था। इस तस्वीर में जो दिख रही हैं, वो हैं 35 साल की युका, जो अपने 12 दिन के बेटे को गोद में खिला रही हैं। कोरोना की वजह से इंडोनेशिया के अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं के सा...