Skip to main content

इटली में लाॅकडाउन पालन कराने के लिए 8000 मेयर ने मोर्चा संभाला; सड़काें पर उतरे, फेसबुक से समझाया फिर भी नहीं माने ताे ड्राेन से अपमान

जैसन हाेराेविट्ज.पर्यटन का प्रमुख केंद्र इटली देखते ही देखते काेराेनावायरस का एपीसेंटर बन गया। एक समय लाेग लाॅकडाउन का पालन नहीं कर रहे थे। सड़काें पर निकल रहे थे। ऐसे में देश के 8000 मेयर ने अपने शहराें की कमान संभाली और ऐसी तरकीबें अपनाईं, जिनके चलते लाेग न केवल घराें में रहने काे मजबूर हाे गए, बल्कि वहां नए मामलाें में भी कमी आई। अब 4 मई काे लाॅकडाउन खुलने जा रहा है। जानिए क्या रहे वे तरीके...

  • आस्ति शहर के मेयर माैरिजियाे रासेराे ने भेष बदलकर शहर के सुपर मार्केट का दाैरा कर देखा कि काेई दुकानदार गैरजरूरी सामान तो नहीं बेच रहा। उन्हाेंने कभी चश्मा लगाकर ताे कभी दाढ़ी बढ़ाकर ताे कभी बेसबाॅल कैप और मास्क लगाकर भी दाैरे किए और लाेगाें काे घराें के भीतर रहने की समझाइश दी। यही नहीं, ड्राेन से निगरानी की और नियम ताेड़ने वालाें का तीखे शब्द बाेलकर अपमान कियाताकि वे घराें में रहें।
  • लुकेरा शहर के मेयर एंटाेनियाे टाेटुलाे काे जब मालूम पड़ा कि महिलाओं के बाल डाई करने के लिए सैलून वाले घर जा रहे हैं ताे उन्हाेंने फेसबुक पर वीडियाे मैसेज में कहा कि हेयर ड्रेसर कई घराें में जाएगा ताे आपकाे बालाें में काेराेना हाे जाएगा। ऐसा न करें। उन्हाेंने पिज्जा की डिलीवरी भी बंद करवाई।
  • दक्षिणी शहर बारी के मेयर एंटाेनियाे डेकाराे ने घूम-घूमकर लाेगाें काे समझाया। समुद्र तट पर पिंगपॉन्गखेल रहे लाेगाें काे घराें में लाैटाया। वे कहते हैं- हमने तय किया कि इस दाैरान गरीबाें काे भाेजन मिले, क्वारैंटाइन किए लाेगाें का कूड़ा-करकट समय से उठाया जाए, परिजन के अस्पतालाें में रहने से घराें में अकेले रह गए बच्चाें की देखभाल हाे।
  • कैंपेन के प्रमुख और सालेर्नाे के मेयर रहे विन्सेंजाे डे लुका ने कहा कि हमें मजबूरन असभ्य भाषा में भी लाेगाें काे समझाना पड़ा ताकि अपमानित होने पर वे घराें में रहें। लुका ने एक ग्रेजुएशन पार्टी काे तितर-बितर करने के लिए आग उगलने वाली ब्लाेटाॅर्च भी इस्तेमाल की।
  • ग्वाल्डाे टाबिनाे शहर के मेयर मैसिमिलियानाे प्रेस्क्यूटी ने कुत्ते घुमाने वालाें से पूछा किक्या उनके कुत्ताें काे प्राेस्टेट की समस्या हाे गई, जाे वे घराें से बाहर आए हैं?
  • मेसिना के मेयर काटेना डे लुका ने सिसली से आ रहे लाेगाें काे राेकने के लिए नियम बनाया कि उन्हें 48 घंटे पहले रजिस्ट्रेशन करवाना हाेगा। जब पता चला कि लाेग ईस्टर के पहले चारकाेल के बैग खरीद रहे हैं, ताे धमकी दी कि हमने चार बड़े ड्राेन का ऑर्डर दिया है। बाहर घूमने वालाें काे ड्राेन पकड़ लेगा। अपने घराें में जाइए।


आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
इटली में लॉकडाउन का पालन करवाने के लिए लोगों पर ड्रोन से नजर रखी जा रही है। - फाइल फोटो


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3aP1eGZ
via IFTTT

Comments

Popular posts from this blog

किसान दादा का दर्द देख 9 साल के बच्चे ने बनाया टिकटॉक वीडियो, मासूमियत भरी आवाज में वह बोला- देखो, गेंदा कैसे फेंकना पड़ रहा है

कुणाल की उम्र नौ साल है और वो मेरठ जिले के लावड कस्बे में रहते हैं। उनके दादा छेद्दा सिंह एक किसान हैं और बीते कई साल से गेंदे के फूल की खेती कर रहे हैं। इस साल जब लॉकडाउन के चलते छेद्दा सिंह की फूलों की सारी फसल बर्बाद होने लगी तो कुणाल ने अपने दादा की मदद के लिए एक बेहद मासूम प्रयास किया। कुणाल ने एक बर्बाद होते फूलों का एक वीडियो बनाया और टिकटॉक पर इसे साझा करते हुए कहा, ‘देखिए भाइयों देखिए। किसानों को खेत से बाहर कैसे फेंकना पड़ रहा है गेंदा। किसानों का कोरोना वायरस की वजह से बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है। इसीलिए इस वीडियो को लाइक और शेयर करके आगे बढ़ाएं।’ भरपूर मासूमियत और बेहद उत्साह के साथ कुणाल बताते हैं कि उनका ये वीडियो अब तक 125 लोगों ने देख लिया है। यह पूछने पर कि उन्होंने यह वीडियो क्यों बनाया, वे पूरे आत्मविश्वास के साथ कहते हैं, ‘ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग जान सकें कि कोरोनावायरस के कारण किसानों को कितना नुकसान हो रहा है।’ जिस नुकसान का जिक्र कुणाल कर रहे हैं उसकी मार इन दिनों मेरठ की सरधना तहसील के सैकड़ों किसान झेल रहे हैं। यहां लावड कस्बे में सब्जियों और फूलों की अच्छी...

The mystery of the 'blue monkeys' in ancient Grecian frescoes, solved

via World news – breaking news, videos and headlines - CNN https://ift.tt/3ejZ05j

पहली बार ऐसा होगा जब घर पर ही पढ़ी जाएंगी नमाज, चांद दिखने पर 24 या 25 मई को मनेगी ईद

कल यानी शुक्रवार, 24 अप्रैल को चांद दिखने के बाद आज से रमजान महीने की शुरुआत हो गई है। 23 अप्रैल को साउदी अरब में चांद दिखने पर वहां रमजान महीना शुरू हो गया है। कोरोना संक्रमण के कारण जारी लॉकडाउन में मुस्लिमपहली बार तरावीह की नमाज घरमें ही अदा करेंगे। तरावीह रमजान में पढ़ी जाने वाली खास नमाज को कहते हैं।सऊदी अरब सरकार ने मक्का-मदीना बंद कर रखा है। इस कारण वहांउमराह के लिए भी लोग नहीं जा सकेंगे। जून-जुलाई में हज के निरस्त होने की भीआशंका है। 25 अप्रैल यानी आज से एक महीने तक रोजे रखकरपांचवक्त की नमाज व तरावीह घर पर ही पढ़ी जाएंगी। लॉकडाउन व सोशल डिस्टेंसिंग के कारण मसजिदों में नमाज पढ़ने पर रोक लगी है। इस महीने रोजेदार करीब 15 घंटे भूखे-प्यासे रहकर इबादत करेंगे। रमजान के खास दिनशब-ए-कद्र 20 मई को औररमजान का अलविदा जुमा 22 मई को रहेगा। चांद दिखने पर ईद-उल-फितर 24 या 25 मई को मनाया जाएगा। तीस दिन तक अदा की जाएगी तरावीह की नमाज हर मुसलमान को दिन में 5 बार नमाज पढ़ने का नियम है, लेकिन रमजान में 6 बार नमाज पढ़ी जाती है। छठी नमाज रात में होती है, इसे ही तरावीह कहा जाता है। इस नमाज में हर ...

कोरोना के इलाज के लिए मलेरिया की दवा की मांग बढ़ी, भारत इसका सबसे बड़ा सप्लायर, हर महीने बना सकता है 30 करोड़ टैबलेट्स

दुनिया कोरोनावायरस संकट से जूझ रही है। कोराेना के खिलाफ कोई कारगर दवा अभी तक नहीं है।ऐसे में सिर्फ एक दवा हाइड्रोक्सी-क्लोरो-क्विन (एचसीक्यू) की सबसे ज्यादा चर्चा है। केंद्र सरकार ने 25 मार्च को इसके निर्यात पर बैन लगा दिया था। बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति की मांग पर बैन हटाया गया। सिर्फ अमेरिका ही नहीं, दुनिया के कई देश भारत से इस दवा की मांग कर रहे हैं। यह दवा कोरोना की नहीं, बल्कि मलेरिया की है। शुरुआती स्तर पर अभी तक कोरोना के संक्रमण और लक्षणों को कम करने में इसे सबसे ज्यादा प्रभावी माना जा रहा है। हालांकि,शनिवार को देश के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि यह दवा किसको और कितनी देनी है, इस बारे में वह कोई अनुशंसा नहीं करता है। साथ ही यह भी कहा कि बिना डॉक्टर की सलाह के यह दवाई न ली जाए। पिछले 76 साल से भारत में एंटी मलेरिया और रूमेटाइड अर्थराइटिस के उपचार में उपयोग की जा रही इस दवाई की अचानक से बाजार में किल्लत हो गई है। सबसे पहले बड़े पैमाने पर दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान इस दवा का उपयोग हुआ था। यह टैबलेट मूल रूप से इम्यून पॉवर को बढ़ाती है। भारत ने 13 देशों के लिए अपना...

लॉकडाउन से गंगा में मानव मल की मात्रा लक्ष्मण झूले के पास 47 और हरिद्वार में 25 प्रतिशत कम हुई

इन दिनों गंगा-यमुना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तैर रहे हैं। सुखद आश्चर्य के साथ लोग इन वीडियो में बता रहे हैं कि कैसे देश भर में हुए लॉकडाउन के बाद इन नदियों का पानी स्वतः ही बेहद साफ नजर आने लगा है। दिल्ली तक आते-आते जो यमुना पूरी तरह से गंदा नाला दिखने लगती है, इन दिनों फिर से नदी लगने लगी है। ऐसे ही गंगा भी इन दिनों इतनी साफ लगने लगी है कि ऋषिकेश-हरिद्वार तक तो उसके पानी को पीने योग्य बताया जाने लगा है। उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की हालिया रिपोर्ट बताती है कि ऋषिकेश के लक्ष्मण झूला क्षेत्र में इन दिनों गंगा के पानी में फ़ीकल कॉलिफोर्म (मानव मल) की मात्रा में 47 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं ऋषिकेश में बैराज से आगे यह कमी 46 प्रतिशत, हरिद्वार में बिंदुघाट के पास 25 प्रतिशत और हर की पौड़ी पर 34 प्रतिशत दर्ज की गई है। इस रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है लॉकडाउन के दौरान हर की पौड़ी पा गंगा का पानी ‘क्लास-ए’ स्तर का हो चुका है। यानी इसे ट्रीट किए बिना ही सिर्फ़ क्लॉरिनेशन करके भी पिया जा सकता है। ऐसे में यह सवाल बेहद प्रासंगिक लगता है कि गंगा-यमुना सफ़ाई के नाम पर खर्च हो चुक...

Companies badly hit by coronavirus COVID-19 pandemic targets of foreign takeovers, says Rahul Gandhi

via Google News https://ift.tt/3eiFzd9